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अमेजन, एपल और गूगल ने ट्रम्प समर्थकों का पसंदीदा ऐप हटाया; हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप

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पिछले कुछ माह में सोशल नेटवर्क पार्लर अमेरिका में तेजी से बढ़ने वाला ऐप रहा है। फेसबुक और ट्विटर ने गलत जानकारी देने और हिंसा भड़काने वाले पोस्ट हटाना शुरू किए तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लाखों समर्थक इस मुफ्त ऐप पर चले गए। लेकिन, शनिवार की रात पार्लर को अचानक अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करने की नौबत आ गई। अमेजन, एपल और गूगल ने ऐप को अपने स्टोर्स से हटा दिया है। सबसे पहले एपल ने आईफोन और फिर गूगल ने अपने ऐप स्टोर से पार्लर को हटाया। इसके बाद अमेजन ने पार्लर को सूचना दी कि वह उसे अपनी वेब होस्टिंग सर्विस से अलग कर रही है। ऐप पर नियम तोड़ने का आरोप लगाया गया है। अमेजन के फैसले के कारण पार्लर का समूचा प्लेटफार्म जल्द ही ऑफलाइन हो जाएगा। उसे नई होस्टिंग सेवा की तलाश करनी पड़ेगी। पार्लर के प्रमुख अधिकारी जॉन मेट्ज ने एक मैसेज में कहा कि बड़ी टेक कंपनियां प्रतिस्पर्धा खत्म करना चाहती हैं। एक दिन पहले लग रहा था कि टेक्नोलॉजी कंपनियों के खिलाफ ट्रम्प समर्थकों और कट्टरपंथियों के बढ़ते गुस्से से पार्लर को फायदा होगा। ट्रम्प पर ट्विटर की पाबंदी के बाद वह इन लोगों की स्वाभाविक पसंद हो सकता था। ...

900 करोड़ रु. की लागत से 16.7 एकड़ में बन रहा मंदिर, 2023 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद

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15 लाख की आबादी वाला देश अबू धाबी UAE में रह रहे करीब 33 लाख भारतीयों के लिए आस्था का केंद्र बन जाएगा। अबू धाबी में पहला हिंदू मंदिर बन रहा है। जिसका काम तेजी से शुरू हो गया है। 16.7 एकड़ में बन रहे मंदिर परिसर में 45 करोड़ दिरहम (करीब 900 करोड़ रुपए) खर्च होंगे। अनुमान है कि 2023 तक मंदिर निर्माण पूरा हो जाएगा। इस मंदिर में 2000 से ज्यादा कलाकृतियां लगाई जाएंगी। इस मंदिर परिसर में प्रार्थना हॉल, लाइब्रेरी, खेल का मैदान, बगीचा, पानी की सुविधाएं, फूड कोर्ट, दुकानें और पार्किंग भी होगी। इसके लिए 3000 से ज्यादा मजदूर और शिल्पकार काम कर रहे हैं। मंदिर में करीब 5,000 टन इटैलियन कैरारा मार्बल का इस्तेमाल होगा। मंदिर में लगने वाले पत्थर और कलाकृतियों की नक्काशी राजस्थान और गुजरात में हो रही है। मंदिर का बाहरी हिस्सा करीब 12 हजार 250 टन गुलाबी बलुआ पत्थर से बनेगा। माना जाता है कि इन पत्थरों में भीषण गर्मी झेलने की क्षमता होती है और 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी गर्म नहीं होता है। हाथ से तराशी जाने वाली मूर्तियां भारत की संस्कृति और इतिहास को दर्शाती हैं। इनमें अरबी प्रतीकों को भी शामिल ...

मॉल में आप एआई से लैस कैमरों की नजर में; चोरी के आदी हैं तो ये घुसते ही अलर्ट करते हैं- ‘वो आ गया’

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यदि आपको शॉपिंग मॉल या सुपर बाजार की रैक से चाेरी-छुपे सामान उठाने की आदत है तो संभल जाएं। ब्रिटेन के सुपर बाजार और शॉपिंग मॉल में अब आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस (एआई) से लैस फेशियल रिकग्निशन तकनीक वाले कैमरों से निगाह रखकर ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है। दरअसल, ब्रिटेन में फेशियल रिकग्निशन तकनीक से जुड़े स्टार्टअप फेसवॉच ने ऐसे लोगों पर नजर रखकर पता लगाया कि लोग सबसे ज्यादा नैपीज, रेजर ब्लेड, डियोडोरेंट जैसी चीजें अपनी जेबों में रख लेते हैं। कंपनी ने अब ऐसी प्रवृत्ति वाले लोगों की ‘वॉचलिस्ट’ तैयार की है और उसे स्टोर व शॉपिंग मॉल को उपलब्ध करवा दिया है। खास बात यह है कि संबंधित व्यक्ति के शॉपिंग मॉल या सुपर बाजार में प्रवेश करते ही या सीसीटीवी कैमरे में दिखते ही एआई आधारित फेशियल रिकग्निशन तकनीक स्टोर कर्मचारियों को मोबाइल एप पर अलर्ट भेज देती है कि पिछले दिनों सामान उठाने वाला व्यक्ति आ गया है। इस तकनीक से स्टाफ को ऐसे लोगों से निपटने का पर्याप्त समय मिलने लगा है। वे आसानी से तय कर लेते हैं कि क्या कदम उठाने हैं। जैसे पहले सम्मानपूर्वक समझाया जाता है कि वे स्टोर से बाहर चले जाएं। न मानन...

वैक्सीन जल्दी पाने के लिए नेतन्याहू ने 50% अधिक कीमत दी, फाइजर सीईओ को 17 बार फोन किया

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कोरोना टीकाकरण की दौड़ में इजरायल इस समय सबसे आगे चल रहा है। इजरायल ने 20 दिन में अपनी आबादी के पांचवें हिस्से को टीका लगा दिया है। वहां लगभग 18 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। वैक्सीन की ज्यादा डोज और जल्दी सप्लाई के लिए इजरायल ने ब्रिटेन की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा कीमत चुकाई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू ने वैक्सीन बनाने वाली फाइजर कंपनी के सीईओ अल्बर्ट बोर्ला को कुछ ही दिन के अंदर 17 बार फोन किया। ताकि वैक्सीन की ज्यादा डोज उन्हें जल्द से जल्द मिल सके। इजरायल के एक विपक्षी नेता ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू ने अपनी गिरती लोकप्रियता और राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए वैक्सीन के लिए ज्यादा कीमत दी। फाइजर की जिस वैक्सीन के लिए ब्रिटेन ने 30 यूरो (करीब 2700 रु.) प्रति डोज दिए उसी के लिए इजरायल ने 45 यूरो (करीब 4000 रु.) चुकाए हैं। यानी वैक्सीन जल्दी पाने के लिए 50 फीसदी ज्यादा कीमत। फाइजर प्रवक्ता ने कहा- ‘वैक्सीन की कीमत, मात्रा और पहले किए गए वादे पर आधारित है।’ जापान: अस्पताल में भर्ती होने से मना करने पर पेनाल्टी कोरोना ...

अब नए वायरस ‘डिजीज एक्स’ का खतरा, कोरोना से भी तेज

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काेराेना महामारी के वैश्विक संकट के बीच अब नए वायरस ‘डिजीज-एक्स’ के प्रसार की चेतावनी जारी हुई है। अफ्रीकी वायरस इबाेला का पता लगाने वाले डाॅ. जीन जैक्स मुएंब तामफम ने यह चेतावनी जारी की है। डाॅ. तामफम के अनुसार ‘डिजीज-एक्स’ ज्यादा घातक है। कोरोना के मुकाबले यह फैलता भी तेजी से है। इससे मरने वालों की संख्या इबोला की तुलना में 50 से 90% तक ज्यादा हो सकती है। एक अमेरिकी टीवी चैनल से बातचीत में डाॅ. तामफम ने कहा, ‘आज हम एक ऐसी दुनिया में हैं, जहां नए वायरस बाहर आएंगे। ये वायरस मानवता के लिए खतरा बन जाएंगे। भविष्य में आने वाली महामारी कोरोना वायरस से ज्यादा खतरनाक होगी और यह ज्यादा तबाही मचाने वाली होगी। कांगाे में ही महिला मरीज में ‘डिजीज-एक्स’ के लक्षण कांगो के इगेंड में एक महिला मरीज को खून आने के साथ बुखार के लक्षण देखे गए हैं। इस मरीज की इबोला जांच कराई गई। लेकिन यह निगेटिव आई है। डॉक्टरों को डर है कि यह “डिजीज-एक्स’ की पहली मरीज है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘डिजीज-एक्स’ महामारी अभी परिकल्पना है, लेकिन अगर यह फैलती है तो पूरी दुनिया म...

अमेरिका में हर छठवां नागरिक भूख से जूझ रहा, यहां 2008 की मंदी से भी बुरे हालात

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कोरोना की वजह से कई देशों और उनके नागरिकों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है। अर्थव्यवस्था के आकार के लिहाज से दुनिया का सबसे समृद्ध देश अमेरिका भी इससे अछूता नहीं रहा। महामारी के कारण वहां बड़े पैमाने पर लोगों ने रोजगार गंवाया और इसका असर यह हुआ कि अमेरिका में भूख की समस्या खड़ी हो गई। हर चौथा अमेरिकी बच्चा भूखा अमेरिका की सबसे बड़ी भूख राहत संस्था फीडिंग अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां दिसंबर के आखिर में 5 करोड़ से ज्यादा लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे। यानी हर छठवां अमेरिकी भूख से जूझ रहा था। बच्चों के मामले में स्थिति और बुरी है। हर चौथा अमेरिकी बच्चा भूखा रहने को मजबूर है। जरूरतमंदों की संख्या बढ़ रही रिपोर्ट में कहा गया है कि जून से ही अमेरिका में खाने के जरूरतमंदों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। ओवरऑल पूरे देश में ऐसे जरूरतमंद महामारी से पहले की तुलना में दोगुने हो गए हैं। वहीं, ऐसे जरूरतमंद परिवारों की संख्या, जिनमें बच्चे भी मौजूद हैं, तीन गुना बढ़ी है। एक महीने में 54.8 करोड़ खाने के पैकेट बांटे फीडिंग अमेरिका नेटवर्क ने एक महीने में 54.8 करोड़ खाने के पैकेट...

नहीं मानते कि करीमा ने आत्महत्या की है, बलूचिस्तान की आजादी मांगने वालों की हत्या करता रहा है पाकिस्तान: लतीफ जोहर बलूच

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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के जुल्मों के खिलाफ आवाज उठाने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता करीमा बलोच की पिछले सप्ताह कनाडा में मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तानी सेना ने उनकी हत्या करवाई है। हालांकि, कनाडा की पुलिस इसे आत्महत्या मानकर चल रही है। इस मुद्दे पर टोरंटो में करीमा के करीबी दोस्त लतीफ जोहर बलूच से दैनिक भास्कर के लिए अमित चौधरी ने बातचीत की। लतीफ भी बलूचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे करीमा के पुराने पारिवारिक दोस्त रहे हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश... कनाडा पुलिस किसी साजिश की तरफ इशारा नहीं किया है? आपको लगता है कि यह एक आत्महत्या है? टोरंटो पुलिस पर हमें भरोसा है, लेकिन हम यह नहीं मान सकते कि करीमा ने आत्महत्या की है। वह ऐसी महिला नहीं थी। उसकी जिंदगी में कई बड़ी से बड़ी चुनौतियां आई थी, लेकिन उसने कभी हार नही मानी। क्या आप मानते हैं कि करीमा बलोच की मौत के पीछे पाकिस्तान की सेना का हाथ है? नहीं मैं यह नहीं कह सकता कि इसके पीछे किसका हाथ है, लेकिन हम इसे नजरअंदाज भी नहीं कर सकते। इतिहास पर नजर डालें तो बलूचिस्तान के संघर्ष की आवाज उठाने वाले क...

बिना नंबर टीका लगवा रहे लोग, स्वास्थ्य कर्मियों में रोष; कई टीकाकरण सेंटर पर नहीं हो रही निगरानी

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अमेरिका में कोरोना टीकाकरण शुरू हो गया है। पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों, एसेंशियल वर्कर्स और बुजुर्गों को टीका दिया जा रहा है। हालांकि, कई सेंटर से ऐसी शिकायतें आने लगी हैं कि वे लोग भी लाइन तोड़कर शामिल हो जा रहे हैं जो प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं हैं। न्यूयॉर्क के सबसे प्रतिष्ठित अस्पतालों में से एक मॉर्गन स्टेनली चिल्ड्रेन अस्पताल में यह खबर फैली कि नौवीं मंजिल पर लाइन में लगे लोगों की निगरानी नहीं हो रही है। इसमें कोई भी शामिल होकर टीके लगवा रहा है। इस तरह के वाकये अमेरिका में कई अन्य टीकाकरण सेंटर से भी आई है। सरकार के नियमों के मुताबिक सबसे ज्यादा खतरे में मौजूद स्वास्थ्य कर्मचारी को पहले टीका दिया जा रहा है। लेकिन, कई ऐसे लोग कतार में खड़े हो जा रहे हैं जिन्होंने महामारी में ज्यादातर समय वर्क फ्रॉम होम करते हुए बिताया है। जिन अस्पतालों में ऐसे मामले आए हैं वहां के प्रबंधन ने इसके लिए माफी मांगी है। लोगों में ऐसी घटनाओं को लेकर काफी आक्रोश है। लोगों ने ऐसे मामलों की जांच किए जाने और दोषियों को सजा देने की मांग की है। मीडिया को जानकारी देने पर अस्पताल दे रहे हैं जॉब से न...

पहली बार अजन्मे बच्चे के प्लेसेंटा में मिला माइक्रोप्लास्टिक, शरीर में जहरीले पदार्थों को फैला सकता है

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पहली बार अजन्मे बच्चे के प्लेसेंटा (गर्भनाल) में माइक्रोप्लास्टिक (PM) का पता चला है। रिसर्चर्स का मानना है कि इसके कण भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, शिशु के इम्यून सिस्टम पर भी असर डाल सकते हैं। इससे भविष्य में रोगों से लड़ने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। माइक्रोप्लास्टिक के ये कण जहरीले पदार्थों के ट्रांसपोर्टर के तौर पर काम कर सकते हैं। माइक्रोप्लास्टिक के कणों में पैलेडियम, क्रोमियम, कैडमियम जैसी जहरीली भारी धातुएं भी शामिल हैं। हालांकि, अभी पूरी तरह यह स्पष्ट नहीं है कि माइक्रोप्लास्टिक स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित कर सकता है। यह रिसर्च रोम के फेटबेनेफ्राटेली हॉस्पिटल और पोलेटेक्निका डेल मार्श यूनिवर्सिटी ने की है। एनवायर्नमेंट इंटरनेशनल जर्नल में यह रिसर्च पब्लिश भी हुई है। इससे पहले भी मां की सांस के जरिए अजन्मे बच्चे तक ब्लैक कार्बन के कण पहुंचने के सबूत मिले थे। प्लास्टिक बॉटल, नेलपॉलिश के जरिए पहुंचने की संभावना रिसर्च में 18 से 40 वर्ष की छह स्वस्थ महिलाओं के प्लेसेंटा का विश्लेषण किया गया था। 4 में 5 से 10 माइक्रोन आकार के 12 माइक्रोप्लास्टिक के टुकड़े पा...

कोरोना की वैक्सीन बना ली, अफ्रीका पोलियो मुक्त हुआ; कमला हैरिस चुनी गईं अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति

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साल 2020, जब दुनियाभर में कोरोना कहर बनकर टूटा। कोई नाजुक दौर से लड़कर बाहर निकला तो कहीं अपनों का साथ भी छूटा। हर इंसान को एक बात समझ आई कि संक्रमण से बचाव ही फिलहाल असली 'वैक्सीन' है। सालभर सिर्फ वैक्सीन और कोरोना चर्चा में रहे। इस बीच कई बड़ी उपलब्धियां भी सामने आईं। जानिए, दुनिया के वे अचीवमेंट्स जिनकी खबर हमारे सामने से गुजरीं, लेकिन कोरोना ने उन्हें समझने का मौका ही नहीं दिया। 1. कोरोना फैला चीन से, लेकिन वैक्सीन सबसे पहले ब्रिटेन के लोगों तक पहुंची दुनियाभर में कोरोना चीन से फैला, लेकिन वैक्सीन सबसे पहले ब्रिटेन के लोगों तक पहुंची। वहां 8 दिसंबर से वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू हुआ। इसमें 80 साल से अधिक उम्र के लोगों और हेल्थ वर्करों को शामिल किया गया। ब्रिटेन ने फाइजर-बायोएनटेक से 8 लाख डोज खरीदी हैं। यहां 4 लाख लोगों को दो-दो डोज दी जानी हैं। पहला टीका 90 साल की दादी मारग्रेट कीनन को लगा। अब तक 7 वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल मिला: अब तक चीन की 4, रूस की 2 और अमेरिका की 1 वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल मिल चुका है। 2. अमेरिकी एस्ट्रोनॉट क्रिस्टिना कोच ने अंतरिक्ष में 32...

साउथ इंग्लैंड में फैल रहा कोरोना का नया स्ट्रेन, लंदन आने-जाने पर लग सकता है बैन; लॉकडाउन पर भी विचार

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फाइजर की वैक्सीन को इमरजेंसी यूज की इजाजत देने के बाद ब्रिटेन जल्द ही कोरोना महामारी पर काबू पाने की उम्मीद कर रहा था। लेकिन, कोरोनावायरस का नया स्ट्रेन सामने आने से यहां हड़कंप की स्थिति है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने मंत्रियों की आपातकालीन बैठक बुलाकर स्थिति पर चर्चा की है। वायरस का यह रहस्यमयी नया स्ट्रेन लंदन और इंग्लैंड के दक्षिणी हिस्से में ज्यादा मिल रहा है। ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री जॉनसन लंदन से ट्रैवल बैन लगाने पर विचार कर रहे हैं। इस पर अभी आखिरी फैसला नहीं लिया गया है। कोरोनावायरस के इस स्ट्रेन को VUI-202012/01 पहचान दी गई है। माना जा रहा है कि यह स्ट्रेन पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से महामारी फैला रहा है। केंट काउंटी के अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों की संख्या काफी बढ़ गई है। लंदन में भी नए केस तेजी से बढ़े हैं। दोबारा लग सकता है लॉकडाउन ब्रिटेन में 23 से 27 दिसंबर तक लोगों को क्रिसमस बबल बनाने की इजाजत मिलने वाली थी। हर बबल में तीन परिवार मिलकर सेलिब्रेट कर सकते थे। लेकिन, नया स्ट्रेन सामने आने के बाद फिर से देशभर में लॉकडाउन की चर्चा बढ...

8 हफ्ते के बच्चे को जेनेटिक बीमारी, इलाज के लिए चाहिए दुनिया की सबसे महंगी दवा; एक डोज की कीमत 16 करोड़ रु.

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ब्रिटेन में जन्मे आठ हफ्ते के एडवर्ड को जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (SMA) बीमारी है। इसका इलाज दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में से एक जोलगेनेस्मा इंजेक्शन से होना है। इस इंजेक्शन की कीमत 1.7 मिलियन पाउंड यानी 16 करोड़ रुपए हैं। एडवर्ड के माता-पिता ने क्राउड फंडिंग से पैसे जुटाने के लिए मुहिम शुरू की है। उन्हें अब तक 1.17 करोड़ रुपए मिल भी चुके हैं। कोलचेस्टर, ससेक्स में रहने वाले एडवर्ड के माता-पिता जॉन हॉल और मेगन विलीस कहते हैं कि उनके लिए बेटे की जिंदगी बेशकीमती है। उसकी जान बचाने के लिए वे हर मुमकिन कोशिश करेंगे। मेगन कहती हैं कि इंजेक्शन महंगा है, लेकिन रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि यह बेहद कारगर भी है। इसने कई बच्चों की उम्र बढ़ाई है। तीन साल पहले ही मिली SMA की दवा तीन साल पहले तक SMA का इलाज मौजूद ही नहीं था। लेकिन, 2017 में 15 बच्चों को यह दवा दी गई थी, जिससे सभी 20 हफ्ते से ज्यादा समय तक जीवित रहे। जिन 12 बच्चों को हाई डोज दिए गए थे, उनमें से 11 बिना सहारे के बैठ सके और दो अकेले चल पाने में सक्षम हुए। यह इंजेक्शन ब्रिटेन में उपलब्ध नहीं है। इसे अमेरिका, जर्मनी, ब्राजील या ज...

2500 की आबादी वाले ओएमयाकोन में माइनस 51 डिग्री की ठंड में पढ़ने पहुंच रहे बच्चे; यहां का जीवन भी चुनौतीपूर्ण

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आमतौर पर भारत में ज्यादा ठंड पड़ने पर स्कूल एक-एक महीने के लिए बंद हो जाते हैं। लेकिन रूस के ओएमयाकोन शहर में माइनस 51 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी स्कूल खुल रहा है। और तो और हडि्डयां कंपा देने वाली इस ठंड के बावजूद छोटे-छोटे बच्चे क्लास में पहुंच रहे हैं। यह स्कूल 11 साल या उससे कम उम्र के छात्रों के लिए तभी बंद होता है, जब तापमान -52 डिग्री या उससे कम चला जाता है। यह सरकारी स्कूल 83 साल पुराना है, जो साइबेरिया के गांव में स्थित है। इस स्कूल को 1932 में स्टालिन के राज में बनवाया गया था। यहां खारा तुमूल और बेरेग युर्डे गांव के बच्चे पढ़ने आते हैं। ओएमयाकोन की आबादी करीब 2500 है। यहां पोस्ट ऑफिस और बैंक जैसी कुछ बहुत बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं। इस बेहद दुर्गम और चुनौतीपूर्ण जगह पर भी कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है। किसी की तबीयत खराब होने पर टेस्ट कराया जाता है महामारी के बावजूद भी यहां स्कूल खुल रहा है। हालांकि, संक्रमण के बचाव के लिए बच्चों के साथ पैरेंट्स और स्टाफ को भी स्कूल में घुसने से पहले तापमान चेक कराना होता है। किसी भी छात्र या स्टाफ की तबीयत खराब होने पर तत्काल उसका को...

बाइडेन की जीत और ट्रम्प की हार पर मुहर लगाएगा इलेक्टोरल कॉलेज, इस बारे में सब कुछ जानिए

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तीन नवंबर को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुए। जो बाइडेन जीते और डोनाल्ड ट्रम्प हारे। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया जटिल है। बाइडेन को प्रेसिडेंट इलेक्ट भले ही कहा जा रहा हो, लेकिन आधिकारिक तौर पर नतीजों का ऐलान 6 जनवरी को होगा। इसके पहले सबसे अहम चरण इलेक्टोरल कॉलेज वोटिंग है। यह 14 दिसंबर को होगी। इलेक्टोरल कॉलेज पर हमेशा बहस होती रही है। हाल ही में गैलप के एक सर्वे में 61% अमेरिकी नागरिकों ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि राष्ट्रपति का चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज से नहीं, बल्कि पॉपुलर वोट से होना चाहिए। आइए, इलेक्टोरल कॉलेज को बहुत आसान तरीके से समझने की कोशिश करते हैं। ध्यान रहे, इलेक्टोरल कॉलेज का मतलब किसी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से नहीं है। इसका मतलब है जन प्रतिनिधियों का समूह या निर्वाचक मंडल। यही समूह अमेरिकी राष्ट्रपति चुनता है। इलेक्टर और इलेक्टोरल कॉलेज के फर्क को समझिए इसे हालिया राष्ट्रपति चुनाव से समझने की कोशिश करते हैं। ट्रम्प रिपब्लिकन कैंडिडेट थे। बाइडेन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार थे। वोटर ने जब बाइडेन को वोट किया तो उनके नाम के आगे ब्रेकेट में एक नाम ...

अमेरिका में महात्मा गांधी की मूर्ति के चेहरे पर रंग पोता, खालिस्तानी झंडे फहराए

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किसान बिल का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी अब राह से भटकते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में सामने आया है। यहां किसान बिल का विरोध कर रहे कुछ लोगों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया है। विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों के खालिस्तानी झंडे दिखाने की बात भी सामने आई है। किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने शनिवार को भारतीय दूतावास के सामने लगी गांधी प्रतिमा पर स्प्रे से पेंट कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने गांधी के चेहरे को खालिस्तानी झंडे से ढक दिया था। लंदन में भी सामने आ चुकी है घटना दिसंबर की शुरुआत में लंदन में भी ऐसी घटना सामने आई थी। वहां भारतीय दूतावास के सामने प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी और किसानों के पक्ष में नारेबाजी की थी। महात्मा गांधी की मूर्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला 3 जून को भी सामने आया था। अमेरिका के वॉशिंगटन में जॉर्ज फ्लॉयड के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने गांधी की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया था। इस घटना के बाद एक विशेषज्ञ को बुलाकर गांधी प्रतिमा को दोबारा ठीक करवाया गया था। भारतीय दूतावास ने दर्ज कराई थी ...

बिग बैश में 9 हफ्ते में मिलेंगे 74 लाख रु.; टी10 में 10 दिन में 59 लाख रु. मिलते हैं

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ऑस्ट्रेलिया की घरेलू टी20 लीग बिग बैश का 10वां सीजन गुरुवार से शुरू हुआ। 59 दिन तक चलने वाले टूर्नामेंट में 8 टीमों के बीच कुल 61 मुकाबले खेले जाएंगे। देश के बाहर से आने वाले खिलाड़ियों को कोरोना के कारण 11 दिन तक क्वारैंटाइन भी रहना होगा। मौजूदा सीजन में विदेशी खिलाड़ियों को अधिकतम 74 लाख रुपए मिलेंगे। इसके लिए उन्हें 9 हफ्ते तक खेलना पड़ेगा। वहीं यूएई में होने वाले टी10 लीग को देखें तो वहां खिलाड़ी सिर्फ 10 दिन खेलकर 59 लाख रुपए कमा लेते हैं। टी20 रैंकिंग में मौजूदा समय पर टॉप पर काबिज इंग्लैंड के डेविड मलान भी पिछले साल टी10 लीग में उतरे। 8 टीमों के बीच 10 दिन में 29 मुकाबले खेले गए। बिग बैश लीग में ऑस्ट्रेलिया के बड़े खिलाड़ी भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं इसके अलावा इंग्लैंड लिमिटेड ओवर के कप्तान इयोन मॉर्गन, विंडीज के आक्रामक बल्लेबाज आंद्रे रसेल, ड्वेन ब्रावो, लसिथ मलिंगा, युवराज सिंह, जहीर खान जैसे खिलाड़ी भी उतरे। टी10 लीग के अब तक तीन सीजन हो चुके हैं। यह हर साल नवंबर में खेला जाता है। बिग बैश लीग में ऑस्ट्रेलिया के बड़े खिलाड़ी भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। 2014 से अब तक स्टीव स्मिथ ने...